कालसर्प योग शांति पूजा एक महत्वपूर्ण वैदिक अनुष्ठान है जिसका उद्देश्य कालसर्प योग के प्रतिकूल प्रभावों को कम करना है, यह एक चुनौतीपूर्ण ज्योतिषीय स्थिति है जो तब बनती है जब किसी व्यक्ति की कुंडली में सभी ग्रह राहु और केतु के बीच स्थित होते हैं। माना जाता है कि यह संरेखण जीवन में विभिन्न कठिनाइयाँ और बाधाएँ लाता है, जैसे स्वास्थ्य संबंधी समस्याएँ, वित्तीय समस्याएँ, करियर में बाधाएँ और तनावपूर्ण रिश्ते। पूजा इन ग्रहों के हानिकारक प्रभावों को शांत करने का प्रयास करती है, जिससे व्यक्ति के जीवन में संतुलन और सद्भाव बहाल होता है।
ग्रहों की शांति: इस पूजा का उद्देश्य राहु और केतु के हानिकारक प्रभावों को शांत करना है, जो छाया ग्रह हैं और कालसर्प योग का कारण बनते हैं।
ऊर्जाओं में सामंजस्य: यह ग्रहों के प्रभावों में सामंजस्य स्थापित करता है, तथा व्यक्ति को शांति, समृद्धि और समग्र कल्याण प्रदान करता है।
स्थान: मुख्य रूप से त्र्यंबकेश्वर, नासिक में किया जाता है, जो इस तरह के अनुष्ठानों के लिए अत्यधिक शुभ माना जाता है।
प्रक्रिया: इसमें मंत्रों का जाप, प्रार्थना और अनुभवी पुजारियों के मार्गदर्शन में विभिन्न समारोहों का आयोजन सहित विस्तृत अनुष्ठान शामिल हैं।
अवधि: आमतौर पर पूजा पूरी होने में एक से दो दिन लगते हैं।
बाधाओं से मुक्ति: कैरियर, स्वास्थ्य और व्यक्तिगत जीवन से संबंधित बाधाओं पर काबू पाने में मदद करता है।
सकारात्मक परिवर्तन: सकारात्मक परिवर्तन लाता है, व्यक्ति की संभावनाओं और खुशी को बढ़ाता है।
आध्यात्मिक विकास: आध्यात्मिक विकास को सुगम बनाता है और मानसिक शांति और स्पष्टता की भावना प्रदान करता है।
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