वास्तु शांति एक पारंपरिक हिंदू अनुष्ठान है जो प्राकृतिक तत्वों और ब्रह्मांडीय शक्तियों के साथ रहने की जगह को सामंजस्य बनाने के लिए किया जाता है, जिससे निवासियों के लिए शांति, समृद्धि और कल्याण सुनिश्चित होता है। यह वास्तु शास्त्र में गहराई से निहित है, वास्तुकला और भवन डिजाइन का एक प्राचीन भारतीय विज्ञान जो प्रकृति के तत्वों को मानव रहने की जगहों के साथ एकीकृत करता है।
ऊर्जाओं में सामंजस्य स्थापित करना: किसी आवास या कार्यस्थल में पांच तत्वों (पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और आकाश) को संतुलित और सामंजस्यित करना।
नकारात्मक प्रभावों को दूर करना: किसी भी नकारात्मक ऊर्जा या वास्तु दोष को दूर करना जो स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं, वित्तीय कठिनाइयां या घर में असामंजस्य जैसी समस्याएं पैदा कर रहे हों।
आशीर्वाद का आह्वान: शांति, समृद्धि और खुशी के लिए वास्तु पुरुष (संरचनाओं और इमारतों के देवता) और अन्य देवताओं का आशीर्वाद प्राप्त करना।
प्राकृतिक तत्वों का संतुलन: भवन के भीतर प्राकृतिक तत्वों और ब्रह्मांडीय ऊर्जाओं का संतुलन सुनिश्चित करता है, जिससे समग्र कल्याण और समृद्धि को बढ़ावा मिलता है।
वास्तु दोषों का शमन: भवन के निर्माण या लेआउट में किसी भी वास्तु दोष को ठीक करता है जो नकारात्मक प्रभाव पैदा कर रहा हो।
सकारात्मक ऊर्जा को बढ़ावा देना: सकारात्मक ऊर्जा के प्रवाह को बढ़ाता है, जिससे निवासियों के लिए बेहतर स्वास्थ्य, सद्भाव और सफलता प्राप्त होती है।
संकल्प: परिवार का मुखिया या गृहस्वामी ईमानदारी और भक्ति के साथ वास्तु शांति पूजा करने की शपथ लेता है।
देवताओं का आह्वान: वास्तु पुरुष और अन्य प्रासंगिक देवताओं, जैसे भगवान गणेश और नवग्रहों (नौ ग्रहों) का आह्वान विशिष्ट मंत्रों और प्रार्थनाओं के माध्यम से किया जाता है।
हवन (अग्नि अनुष्ठान): एक पवित्र अग्नि समारोह आयोजित किया जाता है, जहाँ वैदिक मंत्रों का उच्चारण करते हुए घी, अनाज और अन्य पवित्र वस्तुओं को अग्नि में अर्पित किया जाता है। अग्नि को शुद्ध करने वाला और देवताओं तक प्रसाद पहुँचाने का माध्यम माना जाता है।
प्रसाद और प्रार्थना: देवताओं को फूल, फल, मिठाई और नारियल जैसे प्रसाद चढ़ाए जाते हैं। उनका आशीर्वाद पाने के लिए विशेष प्रार्थनाएँ और भजन गाए जाते हैं।
प्रतीकों का स्थान: स्वस्तिक और कलश (जल पात्र) जैसे पवित्र प्रतीकों और वस्तुओं को सकारात्मक ऊर्जा को बढ़ाने और किसी भी नकारात्मक प्रभाव को दूर करने के लिए विशिष्ट स्थानों पर रखा जाता है।
प्रसाद वितरण: अनुष्ठान का समापन सभी प्रतिभागियों को प्रसाद (पवित्र भोजन) वितरित करने के साथ होता है, जो देवताओं के आशीर्वाद का प्रतीक है।
स्वास्थ्य और कल्याण: रहने की जगह के भीतर सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह सुनिश्चित करके शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को बढ़ाता है।
वित्तीय समृद्धि: वित्तीय परेशानियों से संबंधित वास्तु दोषों को दूर करके धन और वित्तीय स्थिरता को आकर्षित करता है।
सद्भाव और शांति: परिवार के सदस्यों या भवन में रहने वालों के बीच सद्भाव और शांति को बढ़ावा देता है।
सफलता और विकास: ऊर्जा को संतुलित करके और सफलता के लिए अनुकूल वातावरण सुनिश्चित करके कैरियर और व्यवसाय विकास को सुगम बनाता है।
शुभ दिन: वास्तु शांति आमतौर पर शुभ अवसरों जैसे गृह प्रवेश, जीर्णोद्धार के बाद या वास्तु दोषों के कारण लगातार होने वाली समस्याओं का सामना करने पर की जाती है। अधिकतम लाभ सुनिश्चित करने के लिए ज्योतिषीय विचारों के आधार पर विशिष्ट दिन और समय चुने जाते हैं।
घर या कार्यस्थल पर: यह अनुष्ठान उस स्थान पर किया जाता है जहां वास्तु शांति की आवश्यकता होती है, चाहे वह घर, कार्यालय या कोई अन्य इमारत हो।
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